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उन्होंने ऐसा कैसे किया.? How could they do it..?

Posted by drgorg on April 20, 2010 at 1:57 PM

 

उन्होंने ऐसा कैसे किया.?


इंडस इंड बैंक ने विगत दो वर्षों में अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है., विगत काफी समय से खराब  ऋणों के कारण  संघर्ष करने के बाद बैंक पुन: पटरी पर आ गया है. जो उसकी परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और मार्जिन से देखा जा सकता है.,


कुछ ही समय पहले बैंक, अपनी अनर्जक आस्तियों (एनपीए) के ऊँचे स्तर जो सकल ऋणों के  3 प्रतिशत तक पहुँच गया था के कारण, काफी कठिन दौर से गुजर रहा था. अब बैंक अपने  एनपीए 1.2  प्रतिशत के स्तर पर लाने में सफल हो गया है और उसका नेट इंटरेस्ट मार्जिन (निम) 3 .2  प्रतिशत तक पहुँच गया है जो थोड़े ही समय पहले 1 .6 प्रतिशत  था.


3 प्रतिशत तक का निम एक अच्छा निम माना जाता है और इस स्तर को पाने में  बहुत थोड़े से बैंक ही सफल रहे हैं.


आश्चर्य यह है कि इस बैंक के कासा जमा ( करेंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट ) केवल 23 .7 प्रतिशत के स्तर पर हैं.  लेकिन यह भी है कि बैंक के ऋणों में 40 प्रतिशत हिस्सा कंज्यूमर (उपभोक्ता) ऋणों का है ..जो इस निम को संभव बनाता है.


कुछ और उल्लेखनीय बाते हैं जैसे कि बैंक के ऋणों में वर्ष के दौरान 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है.जो सम्पूर्ण बैंकिंग क्षेत्र की वृद्धि का दुगुना है और बैंक की फी आय में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.


इंडसइंड बैंक की चर्चा क्यों ? क्योंकि उनके एनपीए सिर्फ  3 प्रतिशत पर होने पर भी बहुत ऊँचे स्तर पर माने गए, और इसी कारण से बैंक का प्रदर्शन ख़राब रहा. उनका लो कॉस्ट डिपोजिट 27 -28 प्रतिशत होने पर भी अच्छा माना जा रहा है..


इसकी तुलना हम अपने आप से करें..? लो कॉस्ट डिपोजिट लगभग 65 से  70 प्रतिशत के स्तर पर, और एनपीए 5 प्रतिशत के आस पास ..कंज्यूमर लोन जो अनसेक्यूर्ड या असुरक्षित माने जाते हैं लेकिन जिनमे वसूली शत प्रतिशत और आय अपेक्षाकृत अधिक होती है  15 प्रतिशत से भी कम के स्तर पर थे...क्यों..? क्योकि ग्रामीण बैंकों पर असुरक्षित ऋणों के लिए 15 प्रतिशत की सीमा (सीलिंग ) है.,


दुखद यह है कि शासकीय योजनाओं में जहाँ वसूली बेहद ख़राब है. कोई सीलिंग या रोक नहीं है अपितु लक्ष्य देकर उन्हें जबरिया पूरा करवाया जाता है, और यह भी कि इनमे ब्याज या सेवा शुल्क भी एक सीमित दायरे में ही लिया जा सकता है.


हमारा निष्पादन निरंतर बेहतर होता जा रहा है, लेकिन लगातार अन्य बैंको से मिल रही कठिन प्रतिस्पर्धा से क्या यह नहीं लगता कि ये छोटी छोटी बातें कई बार बहुत महत्वपूर्ण हो जाती हैं..?


अगली बार मिलने तक के लिए विदा ..


तब तक इस पर  हंसें , उपहास भी करें क्यों कि ऐसा कर के भी आप इसी विषय पर चिंतन कर रहे होंगे


आने वाला समय और अच्छा होने की शुभकामनाओं सहित 


सत्यजित

 

 


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