CRGB Officers' Organisation

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(Note :- The entries posted here are the views of authors of the Entrires and not of the DRGB Officers' Organisation, the Organisation does not necessarily subscribe to these)

view:  full / summary

हड़ताल वापस ली गई .. Strike Called Off

Posted by drgorg on March 23, 2010 at 1:05 PM Comments comments (1)

हड़ताल वापस ली गई

आज 23 मार्च 2010 को सायं लगभग 5 बजे, अध्यक्ष महोदय की ओर से हमें पुन: वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया, जहां हमें सूचित किया गया कि देना बैंक के प्रधान कार्यालय से पत्र प्राप्त हुआ है और सूचना दी गई है कि हमारे संगठन द्वारा दी गई लगभग सभी मुख्य मांगे मान ली गई हैं जिनमे प्रमुख हैं 75% एल टी सी नगदी करण, स्टाफ ओवरड्राफ्ट पर प्रायोजक बैंक के समतुल्य ब्याज, प्रमोशन और नयी भरती. हमसे अपील की गई कि हड़ताल वापिस ली जाए,


मित्रो हम इस संस्था को अपनी मातृ संस्था मानते हैं और कभी इसका अनिष्ट नहीं चाहते किंतु जब लगातार अथक परिश्रम और उत्कृष्ठ कार्य निष्पादन के बाद भी बिना किसी कारण हमारे वैध अधिकार भी हमें नहीं दिए गए तो विवशता में हमें भी प्रतिरोध करना पडा., भविष्य में भी यदि आवश्यक हुआ तो हम अपने अधिकारों की लड़ाई में कभी पीछे नहीं रहेंगे.


बहरहाल मांगे पूरी हो जाने का लिखित आश्वासन प्राप्त हो जाने पर हमने हड़ताल वापस ले ली है,


मांगे पूरी होने पर आप सभी को बधाई.  बधाई  इसलिए भी कि आप इस कठिन घडी में संघर्ष के लिए एकजुट रहे, बधाई उन्हें भी जो हमसे नहीं  जुड़े, जिन्हें बिना किसी प्रयास ये सुविधाए मिल जाएँगी और उन्हें भी जो निरंतर उच्चाधिकारियों को बहलाते रहे कि " इनमे दम नहीं है, आप देखना हड़ताल नहीं होगी , इनकी हड़ताल को फलां फलां ,, अकेला ही ख़तम कराने के लिए काफी है " हमारे सदस्यों को भी डराने और भ्रमित करनें के प्रयास किये गए कि ये तो आर्गेनाईजेशन के एक पदाधिकारी के अहम् के कारण हो रहा है, या ट्रांसफ़र के कारण है., फिर भी आप नहीं डिगे आपने हममें विश्वास बनाए रखा अपनी एकजुटता बनाए रखी और आखिरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ही लिया.


हम धन्यवाद देते हैं, अपने बैंक के अध्यक्ष श्री एस. पी. कोहली को, जिन्होंने हमारी मांगो के पूर्ण कराने के लिए प्रयास किया और देना बैंक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को भी, जिन्होंने आखिरकार अपनी सहमति दे ही दी , हम उम्मीद करते हैं भविष्य में वे और भी सह्रदय होंगे और निर्णय शीघ्र लेंगे ताकि हमें हड़ताल की आवश्यकता न हो एवं उन्हें हमारे स्टाफ और उनके परिजनों की शुभकामनाए भी मिलती रहें.


यह तो थी सीधी बात, यहाँ यह बताना अनुचित  नहीं  होगा की एआई आर आर बी ओ एफ के महासचिव -श्री एस के भट्टाचार्य निरंतर इस घटनाक्रम पर अपनी नजर रखे हुए थे, उन्होंने दिनांक 12 मार्च को देना बैंक के सीएमडी को एक ई-मेल किया और उनसे मामले में हस्तक्षेप की मांग की, जब हमारे प्रतिनिधि मंडल से दिनांक 20  मार्च की वार्ता बे नतीजा रही तो उन्होंने देना बैंक को 21 मार्च को एक फैक्स किया जो यहाँ ज्यों का त्यों प्रस्तुत है 


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REFNO. 2011:38:2010                               22ND MARCH 2010

 

TO

THE CHAIRMAN & MANAGING DIRECTOR,

DENA BANK,

MUMBAI – 400 051

 

 

FAX MESSAGE

 

 

PLEASE REFER OUR LETTER NO. 2011:34:2010 DATED12TH MARCH, 2010ON THE ISSUE OF DECLARATION OF TWO DAY’S STRIKE ON 30TH & 31ST MARCH BY DURG RAJNANDGAON GRAMIN BANK OFFICERS’ ORGANISATION(.) DUE TO OUR PERSUASION SHRI KOHLI, CHAIRMAN OF THE RRB HELD DISCUSSION WITH DURG RAJNANDGAON GRAMIN BANK OFFICERS’ ORGANISATION ON 20TH INSTANT BUT INSISTED THAT ISSUES ARE PENDING WITH DENA BANK HEAD OFFICE AND HE CANNOT RESOLVE ANY ISSUES(.) DUE TO ADAMANT ATTITUDE OF SHRI KOHLI AND HIS GOING BACK FROM COMMITMENTS THE SITUATION IS FLARING UP(.) PLEASE INTERVENE TO STOP INDUSTRIAL STRIFE IN DURG RAJNANDGAON GRAMIN BANK(.)

 

 

REGARDS,

 

(S.K.BHATTACHARJEE)

 GENERALSECRETARY

 

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क्या हमें श्री भट्टाचार्य को धन्यवाद देना चाहिए,? या उन्हें जिन्होंने हमारा विरोध किया.या हमारे सदस्यों का मनोबल तोड़ने का प्रयास किया.? या हम धन्यवाद दें उन्हें जिनके विरोध ने हमारा संकल्प और कडा किया कि हमें सफल होना ही है..


अंत में..क्या जिन्होंने इस हड़ताल में सम्मिलित नहीं होने का फैसला किया था या जो लोग चापलूसी और चाटुकारिता वश हमारी मांगों से सहमत नहीं थे क्या वे इन सुविधाओं को स्वीकार नहीं  करेंगे ??


अगली बार मिलने तक .. अलविदा ..


और सोचने के लिए एक प्रश्न ..क्या संगठन सिर्फ कुछ लोगों के हित के लिए कार्य करता है..?


अपना ख़याल रखें.. और वार्षिक लेखाबंदी तत्परता से पूर्ण करें..


आज बलिदान दिवस है.. राजगुरु सुखदेव और भगत सिंह का , उनके बलिदान को नमन और रामनवमी की शुभकामनाओं सहित..


बघेल बी एस

 

 


वार्ता विफल - हड़ताल रहेगी

Posted by drgorg on March 20, 2010 at 12:11 PM Comments comments (0)

वार्ता विफल - हड़ताल रहेगी

20 मार्च को बैंक के अध्यक्ष के आमंत्रण पर हमारे संगठन का 5 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल उनसे चर्चा के लिए गया था किंतु अध्यक्ष श्री एस. पी. कोहली के नकारात्मक रवैये के कारण वार्ता में कोई प्रगति नहीं हुई अध्यक्ष पूर्ववत केवल मांगे पूरी करने के सम्बन्ध में देना बैंक को पत्र लिखे गए होने का विवरण देते रहे और हमारी हड़ताल को औचित्यहीन ठहराने का प्रयास करते रहे.

11 दिसंबर 2009 को एआई आर आर बी ओ एफ़ के महासचिव श्री भट्टाचार्जी से मुलाकात के दौरान भी इन्होने आश्वासन दिया था कि 15 जनवरी 2010 के पूर्व ही समस्त मांगों को पूर्ण कर दिया जाएगा और हड़ताल की कोई आवश्यकता नहीं होगी किंतु अब तक एक भी मांग पूरी नहीं की गई है  बैंक के अध्यक्ष श्री कोहली ने वार्ता के दौरान हमारे संगठन के महासचिव श्री बेदी जो प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे के विरुद्ध एफ़ आई आर दर्ज कराने की धमकी भी दी


जब प्रतिनिधि मंडल हड़ताल स्थगित करने के लिए राजी नहीं हुआ तब श्री कोहली ने सोमवार 22 मार्च को त्यौहार अग्रिम के देना बैंक के बराबर करने का परिपत्र जारी करने की बात कही है. अन्य मांगों के संबंध में उन्होंने पुनः कोई भी स्पष्ट उत्तर नहीं दिया.


हमारे संगठन के पदाधिकारियों ने तत्पश्चात एकमत से निर्णय लिया कि हमारा संगठन 30 और 31 मार्च 2010 को प्रस्तावित हड़ताल पर रहेगा और संगठन के समस्त सदस्य इन तिथियों पर धरना देने के लिए प्रधान कार्यालय के समक्ष उपस्थित होंगे.


अबतक संगठन के पास 143 पंजीकृत सदस्यों में से 123 के हड़ताल में सम्मिलित होने के लिखित सहमति पत्र एकत्रित हो चुके हैं एवं शेष में से अनेक ने टेलीफोन पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है.


सदस्यों को सचेत किया जाता है कि वे किसी प्रकार के दुष्प्रचार पर ध्यान न दें तथा किसी भी दबाव में न आएं. हड़ताल के विषय में किसी भी प्रकार की जानकारी और सूचना के लिए संगठन के पदाधिकारियों से प्रत्यक्ष अथवा टेलीफोन द्वारा संपर्क किया जा सकता है. .


इस वेब साईट पर भी ताजा तरीन जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.

एन.पी.ए. में तीक्ष्ण वृद्धि संभावित - ICRA

Posted by drgorg on February 27, 2010 at 11:52 AM Comments comments (0)

गैर निष्पादक आस्तियों (एन.पी.ए.) में तीक्ष्ण वृद्धि संभावित


क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आइसीआरए का ऐसा पूर्वानुमान  है कि, भारतीय बैंकों में गैर निष्पादक आस्तियों का स्तर मार्च 2010 में  कुल अग्रिमों के 3.25-3.75% तक हो सकता है  जो मार्च 2009  में 2.17%  के स्तर पर थे, पूर्वानुमान एजेंसी द्वारा किये गए  देश के प्रमुख  43 वाणिज्यिक बैंकों की त्रैमासिक समीक्षा / विश्लेषण पर आधारित है.


अपने पूर्वानुमान की पुष्टि करते हुए, आइसीआरए ने कहा है कि बैंकों ने पाया है कि उनके विशेषकर पुनर्गठित ऋण में काफी खामियां हैं, .देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में उनकी  तीसरी तिमाही के परिणाम के मुताबिक अप्रैल से  दिसम्बर 2009 के बीच नौ महीनों में  रुपये  2,621 करोड़ का नया स्लिपेज हुआ है.


इसके अतिरिक्त, इकरा का मानना है कि एक और कारण है जो बैंकों में एनपीए में वृद्धि का कारण  हो सकता  है वह है  ढीला ढाला कृषि क्षेत्र, जहां  बैंक अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक या सरकार से कुछ छूट की उम्मीद कर रहे हैं और अभी तक इस क्षेत्र में काफी अधिक ऋणों को  एनपीए के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है. उम्मीद है कि सरकार किसानों के लिए एक बार में निपटान की योजना  जो 2009 दिसंबर को समाप्त हो चुकी है में अभिवृद्धि कर सकती हैं इस प्रत्याशा में अभी तक इन ऋणों के लिए प्रावधान नहीं किया गया है.


इसके अलावा, आइसीआरए का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को  पूंजी पर्याप्तता अनुपात ( 12% CRAR) बनाए रखने के लिए  रु. 1, 00,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी की ज़रूरत होगी.  हालांकि, एजेंसी का मानना है कि निजी बैंकों के लिए अपनी CRAR  12%  बनाए रखने में कोई विशेष परेशानी नहीं  होगी. ज्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों नें अतिरिक्त  पूंजी के लिए सरकार के पास  विश्व बैंक की  सरकारी बैंकं को  2 अरब डॉलर दीर्घावधि ऋण देने को योजना के अंतर्गत पूंजी प्रदान करनें के लिए गुहार लगाई है.


इकरा का यह भी पूर्वानुमान है कि आने वाले कुछ महीनों में ऋणों पर  ब्याज दरें बढ़ सकती हैं


मित्रो, इस पर विचार करें और फिर बेहद खूब सूरत रंगों के साथ होली मनाएं


आप सभी के लिए रंगों का यह त्योहार जीवन के नए और बेहतरीन रंग लेकर आए, इन्ही शुभकामनाओं सहित


 जल्दी ही फिर मिलते हैं एक नए विषय और चिंतन के लिए नए मसाले के साथ


तब तक के लिए

अलविदा



Phishing Scam Targets PNB ?

Posted by drgorg on February 12, 2010 at 12:53 PM Comments comments (0)

Phishing

 

It has come to notice that, The Punjab Nationa Bank's site has been recently target of phishing scam,.


What's PHISHING actually ? well, In the field of computer security, phishing is the criminally fraudulent process of attempting to acquire sensitive information such as usernames, passwords and credit card details by masquerading as a trustworthy entity in an electronic communication. Communications purporting to be from popular social web sites, auction sites, online payment processors or IT administrators are commonly used to lure the unsuspecting public.

 

So, for our readers, who want it in clearer terms- we would put it like this --Criminals create duplicate sites of, virtually any, usually, financial Institutions Auction and Online payment sites with a slightly different web address and lure the web user to somehow or anyhow to reach those sites, and dupe them in putting in their Password, PIN, Account information, Credit Card details etc etc., later these information are used to defraud and cheat the innocent surfer who had put in their informations.

 

Now, the PNB (Punjab National Bank) is not the first or the only Indian Bank which has been the target of phishing scam, the resemblance of the phishing site with the PNB's Original site is reported to be remarkable and scale of attack was immence. However, when the Bank learnt about this, they immediately put on an alert for their Net Banking Users, More information can be read on the PNBs official site by clicking the following link- https://netbanking.netpnb.com/bayimgs/pnbibs/helpfile/ImportantMsg.htm


So? So,  we would like to alert our readers to be very skepital of email purported to be from BANKs and other Institutions which require you to put in password and account information, and be very very cautious and alert when using the net banking, making any purchase or making any payments online. Phishing is typically carried out by e-mail or instant messaging and it often directs users to enter details at a fake website whose look and feel are almost identical to the legitimate one. to vaoid falling in trap you can observe following precautions-

  1. Keep your User-id and passwords secret.
  2. Select password which is difficult to guess.
  3.  Do not write or disclose your passwords even to officials of the Bank.
  4. Destroy the password mailer (envelope) after changing the passwords,
  5. Change passwords periodically.
  6. Use virtual keyboard shown on the screen, to enter passwords.
  7. Avoid accessing your Bank's Internet Banking from Cyber-cafes or shared networks
  8. Protect your computer with adequate anti-virus solutions.

And last but not the least, Any Bank will not ask its customers to reveal or sent their information or passwords, specially through email, so NEVER-- Never follow any link to Ineternet Banking or Net Banking, received in your EMAIL.Dont ever click any such links received in emails or during CHAT.

 

The entire purpose of writing this much is to make our readers aware of the pros and cons of the facilities they are availing, if this could save even a single surfer from falling in to the trap, it has served its purpose.

 

Untill next time till we meet again with another issue to discuss, keep reading :D, and posting  ( as if anyone really reads all this and then comments..:lol:

 

Wishing you all a very wonderful time ahead

 

Bye

CORE BANKING SOLUTIONS - CBS

Posted by drgorg on January 26, 2010 at 3:18 AM Comments comments (1)

ग्रामीण बैंकों द्वारा भी इनफ़ोसिस फिनैकल का चयन


Once upon a time, , well not that long ago, just a few years back, say 3- 4 years, the finacle was supposed to be the costiliest and RRBs were going in for lot others, whichever solution deemed fit by their higher ups, like BankMate, Checkmate, some RRBs in southern India even got their own software developed.


Infosys' product division,which sells Finacle banking solutions, has received orders from 20 RegionalRural Banks (RRBs) for implementation of Core Banking Solution (CBS), as per a news report.


Infosys Technologies (Finacle) Head Haragopal M said more orders are likely to come as all the RRBs have to migrate to CBS by September 2011, the deadline set by RBI. Currently, there are 86 RRBs in the country of which 3 banks have already become 100 per cent CBS


Union Bank of India sponsored Rewa Siddhi Gramin Bank & Kashi Gomti Samyut Gramin Bank, and Punjab National Bank sponsored Haryana Gramin Bank are fully CBS. as per the said news report.


Infosys Technologies announced that Finacle from Infosys was named a leader in the January 2009 report, "The Forrester Wave: Global Banking Platforms, Q1 2009". Infosys Finacle scored highest on criteria of current offering as well as corporate and product strategy Forrester selected vendors according to scope, global success, and relevance. These were short-listed through a rigorous multi-criteria selection process that included an in-depth appraisal of their coverage of the Forrester banking functions map, next-generational architecture approach, success in 2007, global delivery capability and mind share among the Forrester client base.


Talking about other solution, direct banking, Haragopal told, the company has signed up two major deals, one in Europe and other one in North America. In this kind of market condition a solution like direct banking is compelling proposition for the advanced market.


We are proud that Fiancle being an Indian Product, wining the tough global competition.


The point here is..what should one chose.? the Best or one of the other better ones.? and how to chose.? and does one have to be told what one needs.? by an outsider.? or does one know what one needs and can chose accordingly.? and does the cost really matters.? specially considering the TOC ( Total ownership Cost) - where one doesnt have to worry about maintenance, and hassle free operations..? or chose the one where one needs to get Specialist all the time to even push a button..?


Your comments are welcome as usual


Have a hassle free time


Till we meet again with a new issue to ponder.

Bye

पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम ज्योति बसु का नि&#

Posted by Baghel on January 17, 2010 at 12:18 PM Comments comments (0)

बुजुर्ग मार्क्सवादी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का रविवार को निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे।पश्चिम बंगाल में दक्षिणपंथी दलों का वर्चस्व तोड़ वहां वामपंथी शासन कायम करने वाले इस राजनेता ने 25 साल तक न केवल उस राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाला बल्कि वहां अनेक कांतिक्रारी परिवर्तन किए।श्री ज्योति बसु को देश में सबसे लंबे समय तक किसी राज्य का मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल है।  लगभग पांच दशक तक देश के राजनीतिक परिदृश्य पर छाये रहने वाले करिश्माई व्यक्तित्व थे  | ज्योतिबाबू मार्क्सवाद में पूरी तरह विश्वास करने के बावजूद व्यवहारिक थे विदेशी निवेश और बाजारोन्मुख नीतियां अपना कर अपने अद्भुत विवेक का परिचय दिया था।वे एक कुशल प्रशासक  एवम् सुधारवादी राज नेता थे |

उन्होने  पंचायती राज और भूमि सुधार को प्रभावी ढंग से लागू किया था।  

श्री ज्योति बसु के निधन पर हमारा सगठन हार्दिक  सवेदना ब्यक्त करता है |

2010 में रु. 30,000 करोड़ के ऋण एनपीए होनें की संभावना

Posted by drgorg on January 16, 2010 at 12:25 PM Comments comments (0)

वैश्विक श्रेणिकारक (Rating) संस्थान (agency) फिच का अंदेशा 

भारतीय बैंकों में वर्ष 2010 में एनपीए का स्तर 1 प्रतिशत बढ़ सकता है,

विगत वर्षों के दौरान पुनर्गठित  ऋणों से  लगभग 2 तिहाई के इस वर्ष के दौरान परिपक्व होने की संभावना है  जिसमें से रु. 30 000 करोड़ के ऋणों के  एनपीए होनें की संभावना जताई जा रही है


A news item says that during the year 2010 the Indian Banks ,may increase their liabilities in the form of incerased NPA.


Fitch, the global rating agency warned, on Monday  that NPAs of banks may go up by 1%.with a specific reference to restructured loans, where loans worth Rs 30,000 crore  could turn sub prime or NPA or Bad by next year when two-thirds of these are expected to mature.


Fitch report has become more significant as RBI had already advised the banks to be more prudent in extending credit on teaser rates. During 2008-09 and in the first quarter of 2009-10, banks restructured on an average 4.4% of their total loans, which was marely 0.71% in 2007-08.


Restructuring was mostly in the form of rescheduling principal for a period of 12 to 24 months, thereby giving the borrowers time to handle the down-turn.


During 2009, besides lowering interest rates, many of the banks had restructured their existing loan portfolios of the real estate.


While overall the NPAs of banks had increased to Rs. 66,900 crore as on 31-03-2009 from Rs 55,800 crore on March 31, 2008, the credit extended to commercial real estate sky-rocketed.


Outstanding credit to the commercial real estate of Indian banks, at the end of March 2009 was Rs 91,500 crore against Rs 63,000 crore as of March 2008, it was not only an increase of 45% over the previous year but was more than double the amount of Rs 44,000 crore exposure during the flourinshing period of 2007  for the banks.


Major portion of this huge lending came from the government banks despite the fact that the RBI had prescribed limits on banks exposure to individual and group borrowers as a preventive measure in view of the ongoing sub-prime crisis in the western world. A part of this growth was also due to the existing loan portfolio being restructured by banks.


Moral of the Story - The Public Sector Banks have been recapitalised time and again..and again there may be a Bail Out Package for those, if they seem failing, it is fact that big banks just write off their small loans specially under Govt. sponsored schemes as quickly as even before you can read this article,viciating the recovery atmosphere..Just becuase they have the previledge of huge capital base and Govt. to protect them, What about smaller banks.? and specifically us.. ? Moreover, infusing this much of easy money..does it have any impact on our Price Hike crisis.?.


I am baffled enough to think more..if you can please suggest


Till we meet again with another issue to discuss,


Have a fabulous time


Bye


 


 

नव निर्वाचित पदाधिकारियों का बैठक

Posted by Baghel on January 15, 2010 at 2:03 PM Comments comments (1)

दिनांक १२ जनवरी २०१० को नव निर्वाचित पदाधिकारियों का बैठक रखा गयाजिसमे  कार्यकारिणी समिति में  नए सदस्य शामिल किए गए . बैठक में प्रबंधनके पास लंबित मांगो पर विचार के लिए बैंक के निदेशक मंडल से चर्चा के लिएअध्यछ महोदय को पत्र प्रेषित कर निदेशक मंडल से चर्चा के लिए समयनिर्धारित करने का  निर्णय लिया गया.  दिनांक ११ दिसंबर २००९ को AIRRBOFके महासचिव श्री एस. के. भट्टाचार्जी के नेत्रित्व  में  प्रबंधन से चर्चाके दौरान श्री एस . पी. कोहली अध्यछ के  द्वारा १५ जनवरी २०१० तकसकारात्मक निर्णय लिए जाने का आश्वसान दिया गया था . सकारात्मक निर्णयनहीं लिए जाने की स्थिति में  हड़ताल में जाने के निर्णय से  प्रबंधन को अवगत करा दिया गया था . लंबित मांगो के संबंध में देना बैंक निदेशक मंडल ,नाबार्ड, भारतीय रिजर्व बैंक , भारत सरकार वित्त मंत्रालय , श्रम आयुक्त ,कलेक्टर एवं पुलिस अधिछक को पत्र लिखकर पूर्व में ही सूचित कर दिया गया है. हमारी प्रमुख लंबित मांग -   प्रबंधन के द्वारा कार्मिक विरोधी निर्णय ,नए कार्मिक की भरती नहीं करना , कार्य की अधिकता , डंडा चलाने  एवं नौकरीसे निकालने की धमकी देना ,अकर्मण्य कार्मिक को प्रोत्साहन देना , कोरबैंकिंग की प्रक्रिया में अनावश्यक विलम्ब करना , ATM  नहीं लगाना ,शाखाओं में सुरछा ब्यवस्था उचित ढंग से नहीं करना , संदेश्वाहको की भरतीनहीं करना अथवा दैनिक वेतन पर काम कराने का मौखिक आदेश देकर मजदूरी का भुगतान नहीं करना,निकट भविष्य में सेवानिवृत होने वाले अधिकारियों केस्थान पर स्थानापन्न अधिकारी तैयार नहीं करना , पद्दोनात्ति प्रक्रिया कोबंद करना , बैंक की ब्यवसाय वृद्धि के लिए कारगर तरिका नहीं अपनाये जाने,अवकाश यात्रा रियायत का ७५ प्रतिशत नकदीकरण को लागू नहीं करना ,अन्यग्रामीण  बैंको में लागू सुविधाओं को नहीं देना   आदि मुख्य मांग है . हमने अपनी उचित मांग के सम्बन्ध में केन्द्रीय संगठनो  को अवगत कर दिया है , अभी भी हमारा प्रयास बातचीत से समस्यों का निराकरण करना है जोप्रबंधन के हाथ में है.

 


महंगाई से परेशान सरकारी कर्मचारी करेंगे ह&#23

Posted by Baghel on January 15, 2010 at 12:39 PM Comments comments (1)

महंगाई से परेशान केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारी जल्द ही हड़ताल पर जाने वाले हैं।

हड़ताल की तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लॉईज एंड वर्कर्स की बैठक में यह फैसला लिया गया है। बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों के सदस्य भी मौजूद थे।

कन्फेडरेशन के महासचिव के. के. एन. कुट्टी ने बताया कि सरकार बढ़ती महंगाई से आंखें मूंदे बैठी है। कोई भी कारगर कदम नहीं उठाया जा रहा है। सिर्फ ब्लेम गेम चल रहा है। सरकार को जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। थोक के मुकाबले वस्तुओं की रिटेल कीमत तीन-चार गुना बढ़ाने वाले बिचौलियों और व्यापारियों पर शिकंजा कसना चाहिए। बाजार में चीजों की डिमांड कम करने वाली शक्तियों पर अंकुश लगाना चाहिए, मगर सरकार ऐसा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि छठे वेतन आयोग में जितनी सैलरी बढ़ी, उससे कई गुना ज्यादा महंगाई बढ़ गई है। दालें और चीनी की कीमत रेकॉर्ड स्तर पर है।

कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गर्वनमेंट एंप्लॉईज एंड वर्कर्स की दिल्ली कमिटी के वर्किंग प्रेजिडेंट अशोक कनौजिया के अनुसार, केंद्र और राज्य कर्मचारियों के सभी कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल के लिए सहमति दे दी। यह फैसला भी हुआ है कि अगर कोई श्रमिक संगठन महंगाई के खिलाफ हड़ताल करेगा तो हम उसका साथ देंगे। कनौजिया का कहना था कि महंगाई से घर का बजट बिगड़ गया है। भविष्य के लिए सेविंग करना नामुमकिन हो गया है। सरकार, कर्मचारियों से ऐसे खिलवाड़ नहीं कर सकती।

 सा भा र Nawbharat Times 14 Jan 2010

 


नए प्रबंध निदेशकों की नियुक्ति ??

Posted by drgorg on January 14, 2010 at 11:23 AM Comments comments (1)

श्री अशोक  दत्त   (इलाहबाद बैंक )  देना  बैंक  के नए ई ड़ी होंगे.?

40 महा प्रबंधको की सूचि तैयार . कई बैंकों में नए प्रबंध निदेशकों  की नियुक्ति होना है  , साक्षात्कार फरवरी में संभावित


According to a news item the Government has already prepared a list of around 40 General Managers  from public sector banks to be interviewed for promotion to Executive Directors (EDs). 16-17 EDs will be selected from this list, interviews for the posts of ED are supposed to be held in February.


Ms Usha Thorat, Deputy Governor of Reserve Bank of India will be the head of the Interview panel, and will have four other members according to the news.


Chairmen of  11 public sector banks are retiring in 2010, these vacancies will be filled up by EDs. About 20 fresh vacancies are estimated for EDs this year. Of the 20, three GMs have already been selected as EDs in 2009.


Other then EDs who will be promoted as chairmen, four EDs will retire in 2010. besides these, some of the banks, e.g. United Bank of India which has reached the Rs One Lakh Crore-business, will be eligible for a second ED.


According to the rules, GMs, who still have three more years for retirement, are eligible to appear for interview for ED.


News says that the finance ministry has sought consent from M R Naik of Corporation Bank for the second ED post at Allahabad Bank. Similarly,Ashok Dutt of Allahabad Bank is scheduled to go to Dena Bank as ED and S L Bansal of Union Bank of India is likely to become ED at Kolkata-based United Bank of India.


Since friends, the articles here dont fetch comments from you, I wouldnt ask you to post your comments, or let us know your views, but just think what a huge excercise it may be. and what should the basis be for selection for the promotions.? even if it is held for a very low post.?


Happy Makar Sankranti


Till we meet again


have a lot of Til and Gud & sweeten your atmosphere


Bye


Courtsey Business Standard Mumbai Thursday, Jan 14, 2010


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